This is another humorous and satirical piece titled "Parichay (Par Shakal Se Chor Nazar Aate Ho)" (The Introduction - But You Look Like Thieves by Your Faces), written by Arnab Ganguly, an enforcement officer in the Narcotics department (C.B.N.).It tells the story of two government officials traveling in a crowded train without tickets, and their witty encounter with a fellow passenger who keeps mocking their appearance despite their "honest" claims.
परिचय
(पर शक्ल से चोर नज़र आते हो)
अपने बड़े बंधु निर्दयीशंकर के साथ रेल यात्रा पर निकल चले थे,
बिन आरक्षण और बिना आरक्षक के साथ
3rd क्लास की यात्रा कर रहे थे, जैसे मंत्री और संतरी की जोड़ी लग रहे थे।
3rd क्लास में ए.सी. के एनटाइटलमेंट वाले उसी प्रकार शोभा बढ़ाते हैं
जिस प्रकार महात्मा गांधी की तस्वीर के बगल में मल्लिका शेरावत नज़र आती है।
बहरहाल, $3rd क्लास, और इटावा से कानपुर की दूरी
पसीना टपका जाएऔर ट्रेन में मानवता की सामूहिक खुशबू यूं समाए
लगे जैसे इससे अच्छी महक तो कॉलोनी के सेप्टिक टैंक से आए।
तभी भीड़ में से देवता समान सामने एक सहयात्री ने अपना थोबड़ा हिलाया
पहले तो हमें शक हुआ कि उन्होंने कुछ फरमाया या बबल गम चबाया।
महानुभाव सीधे विषय पर आये और फरमाये—
"कुछ काम धाम करते हो या सिर्फ 3rd क्लास में मटर गश्ती करते हो?"
भाईसाहब बोले— "सरकारी नौकर हैं हम, सरकारी टूर पर निकले हैं।"
सहयात्री ने विभाग का नाम पूछा और हमने गर्व से बताया— सी.बी.एन. (C.B.N.)।
वो बोले— "अच्छा सी.बी.आई. में काम करते हो?
पर प्यारे, शक्ल से दोनों चोर नज़र आते हो,
बड़ा ही नेचुरल लुक है।"
हमने उन्हें टोका— "नहीं-नहीं सी.बी.आई. नहीं, सी.बी.एन.
यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स।"
सहयात्री तेज निकले, बोले— "अरे तो यूं कहो न नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो,
गृह मंत्रालय, भारत सरकार।
सी.बी.एन. घूम कर एन.सी.बी. ही बनता है।
पर जनाब, शक्ल से दोनों चोर नज़र आते हो।"
हमें समझ में आ गया कि यह घोंचू सा दिखने वाला शख्स कोई रिटायर्ड सरकारी एल.डी.सी. ही होगा।
इतनी जानकारी तो वित्त एवं गृह मंत्री को भी नहीं कि सी.बी.एन. और एन.सी.बी. का फर्क तो दूर
इनका अस्तित्व भी है कहीं।
निर्दयी शंकर ने पैंतरा बदला और कहा— "जी हम सेंट्रल एक्साइज से संबंध रखते हैं।"
सहयात्री ने ठहाका लगाया और फिर बोले— "सेंट्रल एक्सरसाइज (Exercise)!
भला कसरत का ऐसा कौन सा राष्ट्रीय विभाग है?
"हमने अनुवाद किया और बताया— "जी केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क।"
उन्होंने पूछा— "उत्पाद यानी प्रोडक्शन ......किस चीज का करते हो?"
हमने कहा— "कुछ भी नहीं।"
वो बोले— "उत्पाद नहीं तो शुल्क किस बात का लेते-देते हो?"
हमने फिर पैंतरा बदला और समझाया—
"भाईसाहब हम अफीम पैदा कराते है दवाई कम्पनियों के लिये,
इसके अलावा अवैध अफीम, हेरोइन और गांजा भी पकड़ते हैं।"
वो फरमाये— "वाह बेटा! एक तरफ अफीम की खेती कराते हो
और दूसरी तरफ बेचने वालों को पकड़ते हो?
अगर पकड़ना ही था तो बोया क्यों और बोया तो पकड़ा ही क्यों?"
बड़ा मुश्किल पड़ा उनको समझाना,
अपने विभाग का उनको पहचान करवाना।
हमने परिचय दिया यह निरीक्षक हैं और हम उप-निरीक्षक,
छोटे-मोटे सरकारी नौकर हैं।
उन्होंने सरकारी नौकर की परख वाला के.बी.सी. का परीक्षण रखा—
पूछा: घूस लेते हो? जवाब: नहीं, कोई स्कोप (उपाय) भी नहीं।
पूछा: काम चोरी करते हो? जवाब: नहीं, कभी-कभी बारह घण्टे लगातार भी काम करते है।
पूछा: ओवर टाइम मिलता है? जवाब: नहीं, कोई स्कोप (उपाय) भी नहीं।
पूछा: प्रमोशन हुआ है? जवाब: नहीं, कोई स्कोप (उपाय) भी नहीं।
पूछा: हड़ताल और नारेबाजी करते हो? जवाब: नहीं।
पूछा: चुगली करना जानते हो? जवाब: नहीं।
वो बोले— "वाह बेटा! ईमानदारी से काम करते हो
पर खुद को सरकारी नौकर बताते हो।
सच्ची बात तो यह है साले (अश्लीलता को क्षमा करें)
शक्ल से दोनों चोर नज़र आते हो।"
फिर पैंतरा बदले और हम बोले— "जी पुलिस से संबंध रखते है, वर्दी और पिस्तौल साथ में रखते हैं।"
तो श्रीमानजी ने फिर के.बी.सी. नुमा परीक्षण दोहराया:
बेवक्त पान चबाते हो? हमने जवाब दिया: नहीं!
माँ, बहन की गालियां बिना वजह बकते हो? हमने जवाब दिया: नहीं!
थाने में, कार्यालय में दारू पीते हो? हमने जवाब दिया: नहीं!
गंदी-गंदी पिक्चरें देखते हो? हमने जवाब दिया: नहीं!
घर पर, दफ्तर में खूब झूठ बोलते हो? हमने जवाब दिया: कभी-कभी!
वो बोले— "संत जैसे जीते हो, और खुद को दरोगा बताते हो।
पर सच मानो प्यारे, शक्ल से दोनों चोर नज़र आते हों।"
फिर जैसे उनके दिमाग में बिजली कौंधी और झट से वह पूछे— "क्यों टिकट लिया है?"
हमने बहाना बनाया कि ट्रेन छूटते-छूटते बची और टिकट लेते-लेते खिड़की पर ही छूटी।
उन्होंने निष्कर्ष निकाला— "इस उम्र में बिना टिकट सिर्फ परिचय पत्र के सहारे यात्रा करते हो,
कोई शक नहीं दोनों सरकारी नौकर जैसा ही व्यवहार करते हो।
पर सच मानो प्यारे, शक्ल से दोनों चोर नज़र आते हो।"
ARNAB GANGULY Inspector (OPIUM)
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