This is a satirical Hindi piece titled "Future Bright Hai" (The Future is Bright), which uses a dialogue between two donkeys to mock the work culture of government service. सूक्कू का चुटकुला Future तो मेरा bright है। नारकोटिक्स के दादा भाई नारोजी यानी 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ सी.बी. एन.' पाणीग्रही जी ने हौसला दिलाया, तो हममें भी कविता संरचना का जोश आया। कहानी है दो गधों और उनके विचारों की। भीतर छुपे भावार्थ पर जाएँ और कटाक्ष को सरकारी नौकरों पर आजमाएँ। सरकारी नौकर होते हैं दो प्रकार के: एक काम के और दूसरे न किसी काम के न काज के। मेरी कहानी में भी हैं गधे दो प्रकार के: एक घिसते-पिसते और सर फोड़ते धोबी का, और दूसरा जो सड़क पर ट्रक के हॉर्न पर भी न हिले डुले और बीच सड़क में अकड़ कर पड़ा रहे जमके। तो बात है उस दिन की जब लकड़हारे के गधे ने पास बुलाया धोबी के गधे को और पुचकार कर कहा— "क्यों रे नालायक! घास की क्वालिटी तेरी कुछ बढ़कर है क्या जो सुबह से शाम तक पिसता है और घिसता है और रात को दारू पीकर टुन्न धोबी के मार को सहता है। जरा मेरी ओर देख-देख। खाते-पीते घर का हू...